नई दिल्ली, : जब भी रामायण या
रामचरितमानस की बात होती है, तो राम के नजरिये और उन्हें
केंद्र में रख कर ही कहा-सुना जाता है। अब थोड़ा डिफरेंट
सोचिए। बेंगलूर में रहने वाली स्मिता अर्नी ने अंग्रेजी
में सीताज रामायण (सीता की रामायण) लिखी है। यह न केवल
अपनी सोच में अत्याधुनिक है, बल्कि इसका रूप भी नए जमाने
के अनुकूल है। स्मिता ने इसे ग्राफिक नॉवेल के रूप में
लिखा है। ग्राफिक नॉवेल, कॉमिक स्टि्रप्स (चित्रकथा) के
रूप में लिखी गई कहानी है। स्मिता की लिखी कथा को पश्चिम
बंगाल के पश्चिम मिदनापुर जिले के निर्भयपुर गांव में
रहने वाली कलाकार, मोन्या चित्रकार ने लोकशैली के चित्रों
से सजाया है। अमेरिका के माउंट होलयोक कॉलेज में धर्म और
सिनेमा की पढ़ाई करने वाली स्मिता को क्यों रामकथा नए
सिरे से कहने की जरूरत महसूस हुई? वह कहती हैं कि मैंने
कई भाषाओं में रामकथा के कई-कई संस्कण पढ़े। मुझे सबसे
दुखद पक्ष सीता की अग्निपरीक्षा का लगता था। मैंने पाया
कि सभी रामकथाओं में अग्निपरीक्षा को बहुत ग्लैमर प्रदान
किया गया। स्मिता कहती हैं, सच यह है कि युद्ध में सिर्फ
पुरुष ही नायक के रूप में उभरते हैं। जबकि स्ति्रयां हर
प्रकार से पराजित होती हैं। वे अपने पिता, पति और पुत्रों
को खोती हैं। वे वैध्यव्य झेलती हैं। कष्ट उठाती हैं।
उन्हें युद्ध में कोई श्रेय नहीं मिलता। यही सीता के साथ
हुआ।